Monday, December 8, 2014

सफलता का मूल मंत्र है - समय का सदुपयोग

सफलता का मूल मंत्र है - समय का सदुपयोग  
(राजभाषा विभाग,  भारत सरकार, गृह मंत्रालय से २०१४ में पुरुस्कृत तथा राष्ट्रपति के कर कमलों से सम्मानित लेख)

                   सम्पूर्ण विश्व में ऐसे अनेक महापुरुष, विद्वान् दार्शनिक, विचारक, राजनीतिज्ञ, वैज्ञानिक, अभिनेता, और सामाजिक कार्यकर्त्ता आदि  सफल लोगों की सूची हमें सहज ही मिल जाएगी तथा जिनका नाम हमारी जुबान पर सदैव रहता है, जिन्होंने अपने जीवन में समय के महत्त्व को समझा और उसका सही उपयोग करके ऐसे, अपने-अपने क्षेत्रों में, अनेक कार्य किये जिससे उन्हें महान कार्यों को करने  की प्रेरणा मिली और विश्व में अपना नाम अर्जित कर महान सफलताए प्राप्त की । हमारे समाज व आस-पास में भी ऐसे ही अनेक लोग मिल जायेंगे जिन्होंने जीवन में समय के रहस्य को पहचाना और सही दिशा में अपनी आतंरिक उर्जा को समय के साथ जोड़कर जीवन में सफलताये प्राप्त कर बड़े-बड़े पदों पर अपना स्थान बनाया और देश के लिए महान कार्य किये।    
                  

                     आज यह ज़रूरी हो गया  है, कि हम सभी को भी अपने जीवन काल में समय की महत्ता को समझाना होगा ताकि हम आने वाली हमारी भावी पीढ़ी को सही मार्गदर्शन दे सकें । अपने जीवन की नई शुरुआत का सही समय है, जिसमें हम अपनी गलतियों में सुधार करके, नियमित सही व् अनुशासित दिनचर्या व्  नई उर्जा और उमंग के साथ अपने व्यक्तित्व को निखारने, अपनी शिक्षा बढाने साथ ही अपने कैरिएर को मजबूत बनाने में अहम् भूमिका निभाए, जो हम सब की सफलता का मूल-मंत्र होगा।
                    
                     आइये, क्यों न हम सभी आज ही यह संकल्प करें, कि हम अपने मूल्यवान जीवनकाल में समय का सदुपयोग करेंगे और सफलता की चरम सीमा को पाने का प्रयत्न करेंगे जिससे हमारे साथ हमारी आने वाली भावी पीढ़ी, सम्पूर्ण समाज व् देश के लिए कुछ ऐसे कार्यो को करने की प्रेरणा और ताकत मिले, जिससे हम अपने परिवार, समाज और देश की भलाई में महत्वपूर्ण योगदान दे सके।  सफलता पाने के लिए समय के सही उपयोग का बहुत बड़ा योगदान होता है, यह हम सभी जानते है। फिर भी आइये कुछ विशेष बातों को अपने दैनिक दिनचर्या में अपनाने या ढालने की कोशिश करते है  जो हमें समय के सही उपयोग में सहायक हो सकती है।  
·         अगर आप सफल होना चाहते हैं, तो आपको सफलता के घिसे-पिटे रास्तों पर चलने के बजाय नये रास्ते बनाना चाहिये। ~ जान. डी. राकफेलर

समय का पूर्ण उपयोग-   कुछ बेहतर पाने के लिए हमें समय को लेकर अधिक सचेत व सावधान रहना होगा।  यह भी ध्यान रखना होगा कि हम समय को किस प्रकार और कैसे व्यतीत करते है। समय का उचित संयोजन/प्रबंधन करने के लिए यह भी तय करना होगा कि कि हम ऐसे कार्य करें जो हमारे जीवन में अच्छे मूल्यों व् आदर्शों की स्थापना करे। इसलिये यह आवश्यक है, कि काम के दौरान सभी छोटी-छोटी बातों का ख्याल करें जो हमारे लिए लाभकारी हो। समय का सही उपयोग तभी संभव है, जब हम अनावश्यक बातों को कभी भी प्राथमिकता ना दे।  
·         हालांकि कोई भी व्यक्ति अतीत में जाकर नई शुरुआत नहीं कर सकता है, लेकिन कोई भी व्यक्ति अभी शुरुआत कर सकता है और एक नया अंत प्राप्त कर सकता है। ~ कार्ल बार्ड

सही कार्य योजना, सृजनात्मकता एवं तत्परता   - यदि हमारे समक्ष कार्य की योजना का सही प्रारूप जैसे किसी भी कार्य को करने में लगने वाली ज़रूरी सामग्रियों ,प्रक्रियाओ व उस पर लगने वाले समय की निश्चित रुपरेखा आदि हो तब कार्य को प्रारंभ से अंत तक करने में सरलता के साथ संपन्न करने की आत्म-संतुष्टि मिलती है। इसके अलावा हम अपने खाली समय को हम कहाँ और कैसे बिताये, किन विषयों पर वार्तालाप करें तथा किस प्रकार के कार्यक्रमों और सामाजिक सम्मेलनों में जाये, इन सभी बातों के प्रति भी हमें सतर्क रहना चाहिए और हमें यह भी खोजना चाहिए कि हमारे अन्दर छुपी सृजनात्मकता और योजना को हम और कैसे अधिक प्रभावशाली बनाने में सफल हो। कार्यों को संपादित करने की तत्परता भी एक विशेष व मुख्य कारक होता है। इस प्रचलित तथा प्रासंगिक दोहे से हम सभी अनभिज्ञ नहीं है कि "काल करे सो आज कर, आज करे सो अब, पल में परलय होएगी, बहुरि करेगा कब" अर्थात कार्य को कल के लिए ना  टालें उसे आज ही कर ले, जिसके अनेक फायदे होते है जैसे समय की उपयोगिता का ध्यान रखकर कार्य को पूर्ण करने की ख़ुशी  व कार्य को टालने से होने वाले अनावश्यक मनोवैज्ञानिक तनाव से बचाव         
·         बुद्धिमान व्यक्ति उस समय सीखते हैं जब वे ऐसा कर सकते हैं, लेकिन मूर्ख व्यक्ति उस समय सीखते हैं जब उनके लिए ऐसा करना बहुत जरुरी हो जाता है। ~ आर्थर वैलेस्ले

अनावश्यक दखल से बचे, करें अपने मन की  - एक कहावत है, कि "Too Many Cooks Spoil The Foodयानी बहुत सारे रसोइये मिलकर जब एक ही व्यंजन बनाते  है तब व्यंजन बेस्वाद हो जाता है, अतः बहुत जरुरी है,कि अपने लक्ष्य के लिए आपने अपने दिल और दिमाग में जो कल्पना बनाई हुई है उसमें यदि अनावश्यक दखल होगा तब कार्य की स्वाभिकता खो जाएगी। इसलिए सबकी राय सुने और अपने विवेक से सही और गलत को  निर्धारित करे तथा किसी अन्य के कार्य में, जो आप के कार्य या स्वभाव के अनुरूप न हो में अनावश्यक दखल ना दे। इससे समय की बचत के साथ अच्छी बातों को ग्रहण करके अपनी मंजिल तक पहुँचने में मदद मिल सकेगी।  
·         जब तक किसी व्यक्ति द्वारा अपनी संभावनाओं से अधिक कार्य नहीं किया जाता है, तब तक उस व्यक्ति द्वारा वह सब कुछ नहीं किया जा सकेगा जो वह कर सकता है। ~ हेनरी ड्रम्मन्ड

वर्तमान को पहचाने और रणनीति पर रखे विश्वास  - अपनी  दिनचर्या को सैदव निर्धारित करके रखें ताकि अपने अंदर निहित उर्जा, दक्षता व समय का उपयोग सही दिशा में हो सके। वर्तमान ही जीवन की सच्चाई है, जिसके कारण से ही हम सभी पहचाने जाते है। कई बार हम कार्य का प्रारम्भ तो बड़े जोर-शोर से करते है किन्तु धीरे-धीरे मंजिल के करीब पहुचते समय उत्साह में कमी का अहसास करने लगते है, अतः यह जरुरी होता है कि कार्य को अपने दृढ़-संकल्प से लगन के साथ उसके अंजाम तक ले जाये जिस उत्साह से उसे प्रारंभ किया था। कभी-कभी जीवन में ऐसे भी पल आते है, जब हमें यह अहसास होता है, कि हम अपना समय बेकार कर रहे है या कर चुके है। तब तक मूल्यवान समय तो व्यतीत हो चुका होता है, जो फिर लौटकर नहीं आता है। इसलिए यह आवश्यक है, कि अपने कार्य करने की जो भी रणनीति बनाई हो उस पर पूर्ण आत्मविश्वास के साथ बिना किसी संदेह के अमल करते रहना चाहिए। यह भी ध्यान रखने योग्य है, कि हम भविष्य के बारे में न सोचे ना ही चिंतित हो, क्योकि चिंताओ के सहारे जीवन में कभी भी कुछ हासिल नहीं होता है। अतः वर्तमान को याद रख के अपने कर्मो को सही रणनीति से निष्पादित करने से ही हमारा जीवन सफल हो सकता है।
·         किसी के गुणों की प्रशंसा करने में, अपना समय मत बरबाद मत करो, उसके गुणों को अपनाने का प्रयास करो। ~ कार्ल मार्क्‍स

कदम, मंजिल की ओर रखे तथा स्वयं का मूल्यांकन करें  - अर्जुन ने महाभारत में विजय प्राप्त करने के लिए, अपने लक्ष्य को भेदने के लिए मछली की एक आँख पर निशाना साधने का अभ्यास किया और उसमे सफलता पाई। वैसे ही हमें कार्यो में सफलता पाने के लिए अपने लक्ष्य को निर्धारित करना होगा व जो हमेशा लक्ष्य की ओर जाता प्रतीत होना चाहिए और जिससे हमें हमारे उद्देश्य को प्राप्त करने में मनोवांछित सफलता  मिल सके। मंजिल तक पहुँचने में संघर्ष का परिणाम आपको सदैव मानसिक रूप से ताक़तवर बनाता है जो जीवन के कठिन समय में हमें सदा मानसिक शक्ति प्रदान करता है। अतः अपना पूरा ध्यान केन्द्रित करके आगे बढने का तरीका ढूंढना होगा जो किसी जटिल समस्या को सुलझाने में प्रभावशाली हो सके।
·         सफलता इस बात पर निर्भर करती है कि आप चौबीस घण्टे मे कितने प्रयोग कर पाते है। ~ एडिशन
                             
            एक निश्चित समय के उपरांत हमें अपना भी मूल्यांकन और समीक्षा  करना आना चाहिए, जिससे हमें हमारी क्षमता, कार्य कुशलता, दक्षता एवं दिशा का बोध हो सके।  इसे परखने और समीक्षा के लिए हमें लगातार यह देखना होगा, कि क्या हम सही दिशा में वर्तमान में विश्वास के साथ अपने लक्ष्य, कार्य शैली और रणनीति आदि पर अमल कर रहे है या नहीं।  इस प्रकार के खुद के मूल्यांकन व समीक्षा से हमें हमारी व्यक्तिगत सम्पूर्ण क्षमताओ की परख हो जाती है। जिससे हम हमारी कमजोरियों को दूर करने का प्रयत्न कर सकते है।
·         एक बार किसी कार्य को करने का लक्ष्य निर्धारित कर लेने के बाद, इसे हर कीमत तथा कठिनाई की लागत पर पूरा करें. किसी कठिन कार्य को करने से उत्पन्न आत्म विश्वास अभूतपूर्व होता है। ~ थामस ए. बेन्नेट

स्पष्ट व् सुखद सोच रखे क्योंकि बीता समय नहीं आता दुबारा  - निर्धारित उद्देश्य हेतु यदि हम बिना किसी स्पष्ट विचार से कार्य करते है तब यह आशंका अधिक रहती है, कि हम अपना अधिकांश उपयोगी समय भूल जाते है या ख़राब कर देते है। यह भी हो जाता है, कि हम छोटी-छोटी मुख्य बातो को भी भूल जाते है जो हमें अपने उद्देश्य के मार्ग से भटका देती है। अतः सही और स्पष्ट सोच के साथ अपने कार्य का निष्पादन करना चाहिए जिससे समय की उपयोगिता हो सके और हम मार्ग से भटके नहीं । सही सोच से किये गये कार्यो का हमें सुखद अहसास भी होना चाहिए जो कार्य करने में अतिरिक्त उर्जा व् उमंग भर देती है । मार्ग के बीच में पहुँच कर योजना ना बनाये बल्कि समय-समय पर कार्य की समीक्षा करे और उन्हें लागू करते रहे तब जाकर लक्ष्य की प्राप्ति स्पष्ट व् सुखद होगी । 
·         अधिकांश बड़े लक्ष्य हासिल न हो पाने का कारण यह हैं कि हम छोटी चाजों को पहले करने मे अपना समय बिता देते हैं। ~ रार्बट जे. मैकेन
                         
             यदि एक पेशेवर नजरिये से हमारा विकास होगा तब हम भी एक कुशल व्यक्तित्व के धनी कहलायेंगे।  इसे हासिल करने के लिए पूरा ध्यान केन्द्रित करना आना चाहिए, समय का दुरुपयोग न हो इसका भी पूर्ण ख्याल रखना होगा। साथ ही गलत कार्यो/बातो को नकारना होगा जो समय को नष्ट कर देता है, तब जाकर पेशेवर नजरिया प्राप्त हो सकता है। अपने अन्दर के गुस्से को भी काबू में रखना होगा जो समय के साथ आपके विवेक, बुद्धि के लिए विनाशकारी हो सकता है। जब लक्ष्य प्राप्ति में बाधा आये तो उसे उसे कुछ समय के लिए त्याग दे और अन्य अपनी क्षमता व दक्षता से  बेहतर तरीके से उस कार्य को करने का उपाय खोजे। अपने अंदर जिम्मेदारी और उत्तरदायित्व की भावना का विकास करने से अपने गुस्से पर नियंत्रण रखा जा सकता है। जब आप गुस्सा होते है तब आप भी खुश नहीं रहते और ना ही दुसरे आप से प्रसन्न होते है बल्कि एक गलत सन्देश आपके व्यक्तित्व पर खड़ा हो जाता है।
·         ग़लतियों से न सीखना ही एकमात्र ग़लती होती है। ~ रॉबर्ट फ्रिप्प
                      
              जैसा हमने देखा कि उपरोक्त आवश्यक सभी बातों का यदि हम अपने दैनिक जीवन में समावेश करे, तब हम समय के सही उपयोग के बारे में जान सकेंगें जो हमें हमारे जीवन व व्यक्तित्व विकास के साथ सभी प्रकार की लक्ष्य प्राप्ति की ओर ले जाने में सहायक होगा । अतः जीवन में एक सफलतम व्यक्ति बनने के लिए समय की महत्ता को पहचानना अति-आवश्यक है, जो हमें ही नहीं अपितु आने वाली भावी पीढ़ी को सही मार्ग-दर्शन देने  में सहायक होगा। जो अपने देश को एक मजबूत आधार प्रदान करेगा और अच्छा कार्य करने में अमुल्य योगदान होगा ।  
·         चुनौतियों को स्वीकार करें, ताकि आप विजय के हर्ष का आनन्द महसूस कर सकें। ~ जनरल जार्ज एस. पैट्टोन
·         सबसे बुद्धिमान व्यक्ति के लिए अभी भी कुछ सीखना बाकी होता है। ~ जॉर्ज संटायाना


1 comment:

Unknown said...

Mujhe safalta mein samay ki bhumika per nibandh chahie