ऐसे लॉक डाउन जैसी स्थिति के समय ऑनलाइन बैंकिंग होने का लाभ होना आज पता चल रहा है, बिना देरी के लॉक डाउन में भी सीधे कई काम जैसे सैलरी मिलना और अन्य जरूरी कार्य घर बैठे करना आसान हो गया है , अन्यथा क्या होता सोचना चाहिए🙏
Monday, April 13, 2020
Saturday, April 11, 2020
प्रकृति का रखें ख्याल
आज भी पृथ्वी पर सूर्य का उदय और अस्त होना, पशु पक्षियों का कलरव, पहाड़ों नदियों से पानी का बहना, मौसम में बदलाव होना आदि सब प्रकृति के नियम से सुचारू रूप से संचालित हो रहा है 🙏
उसी पृथ्वी पर आज अपने आप को भगवान समझने वाली अहम से भरी मानव जाती अपने जीवन के अस्तित्व की लड़ाई के लिए जूझ रही है 😦
इस अस्तित्व की लड़ाई में शायद एक आशा की किरण मात्र प्रकृति ही है, जिसके नियमों के साथ हमने छेड़छाड़ कर अनेक खिलवाड़ किए है ।
🙏इस कोरोना का इलाज़ प्रकृति ही कर सकती है जो हमें माफ़ कर जीवन जीने का एक अंतिम मौका दे 🙏 इसके लिए हमें आने वाले समय में प्रायश्चित कर भूल से भी उसके बनाए नियमों के साथ छेड़छाड़ न करने की शपथ लेकर प्रतिज्ञा करनी होगी, जो झूठी नहीं होना चाहिए, अन्यथा अगले लॉक डाउन में मानव अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा 🙏🙏
🙏प्रकृति को बचाए, सुरक्षित रहें 🙏
आज भी पृथ्वी पर सूर्य का उदय और अस्त होना, पशु पक्षियों का कलरव, पहाड़ों नदियों से पानी का बहना, मौसम में बदलाव होना आदि सब प्रकृति के नियम से सुचारू रूप से संचालित हो रहा है 🙏
उसी पृथ्वी पर आज अपने आप को भगवान समझने वाली अहम से भरी मानव जाती अपने जीवन के अस्तित्व की लड़ाई के लिए जूझ रही है 😦
इस अस्तित्व की लड़ाई में शायद एक आशा की किरण मात्र प्रकृति ही है, जिसके नियमों के साथ हमने छेड़छाड़ कर अनेक खिलवाड़ किए है ।
🙏इस कोरोना का इलाज़ प्रकृति ही कर सकती है जो हमें माफ़ कर जीवन जीने का एक अंतिम मौका दे 🙏 इसके लिए हमें आने वाले समय में प्रायश्चित कर भूल से भी उसके बनाए नियमों के साथ छेड़छाड़ न करने की शपथ लेकर प्रतिज्ञा करनी होगी, जो झूठी नहीं होना चाहिए, अन्यथा अगले लॉक डाउन में मानव अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा 🙏🙏
🙏प्रकृति को बचाए, सुरक्षित रहें 🙏
Thursday, October 5, 2017
डिजिटल इंडिया – देश का बदलता स्वरूप
डिजिटल इंडिया – देश का बदलता स्वरूप
जैसा सर्व विदित है
कि हमारे देश भारत को विश्व के विकसित देशों की तरह डिजिटल रुप से सशक्त देश बनाने
के लिये भारत की सरकार द्वारा डिजिटल इंडिया अभियान
चलाया जा रहा है । डिजिटल इंडिया के रुप में इस
महत्वाकांक्षी कार्यक्रम का आरम्भ भारत सरकार द्वारा 1 जुलाई 2015 को
किया गया
है । इस मुहिम का लक्ष्य कागजी कार्यवाही को
घटाने सहित भारतीय नागरिकों को सरकार की सभी सेवाओं को इलेक्ट्रॉनिक तंत्र से उपलब्ध कराने की है। यह आधुनिक भारत के निर्माण
में एक महत्वपूर्ण और बड़ा कदम है, जिसके परिणाम स्वरूप बहुत कम समय में
ही आज देश के अधिकांश लोगों में विभिन्न कार्यों के लिये डिजिटल उपयोगीता में
अभूतपूर्व बढावा और जागरूकता देखने को मिल रही है । ये बहुत ही प्रभावशाली कदम है, जिससे बड़े स्तर पर कागज
निर्माण तथा उसके इस्तेमाल में कमी आयेगी जिससे पेड पौधों की कटाई रूकेगी, जो प्रदुषण रहित
पर्यावरण में अहम सहायक भूमिका अदा करेगी, साथ ही निश्चित रूप से मूल्यवान समय और मानव श्रम की बचत होगी । इस योजना के
तहत किसी भी जरुरी सूचना तक पहुँच के लिये तेज गति इंटरनेट नेटवर्क के साथ सभी शहरी तथा ग्रामीण
क्षेत्रों के लोगों तक जुड़ने के लिये वर्ष 2019
तक
का लक्ष्य निर्धारित किया गया है । इस कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह में देश के
जाने माने प्रमुख उद्योगपतियों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज की तथा भारत के गाँव से शहर तक बड़ी संख्या में
डिजिटल क्रांति को बढावा देने के लिये अपने अपने विचार को साझा किया। शुरूआत में देश के 600 जिलों तक पहुँच के लिये सूचना तकनीक कंपनी
की मौजूदगी में कई सारे
कार्यक्रम रखे गये । इस कार्यक्रम की निगरानी और नियंत्रण, डिजिटल इंडिया
सलाहकार समूह (संचार एवं आईटी मंत्रालय) के द्वारा संचालित की जा रही है जिसका
लक्ष्य भारत को डिजीटल तकनीक से सम्पन्न विश्व का एक बेहतर नियंत्रित स्थान बनाना है। ।
इस योजना से संबंधित विभिन्न स्कीमों को
अनावृत किया जा चुका है जैसे डिजीटल लॉकर, ई-स्वास्थ्य, ई-शिक्षा, राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल, ई-हस्ताक्षर
आदि। पूरे
देश भर में डिजिटल संरचना का निर्माण, डिजिटल साक्षरता, डिजिटल तरीके से सेवा प्रदान करना जैसे
डिजिटल इंडिया के तीन महत्वपूर्णं तत्व
हैं। डिजिटल इण्डिया के माध्यम से “मेड इन इण्डिया” इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसों, उत्पादकों और सेवाओं के पोर्टफोलियो को भी बढ़ावा देना और देश में युवाओं के लिए रोजगार
की संभावना को बढ़ावा देना है।
डिजिटल इंडिया से सम्भावनायें – यह एक ऐसी योजना है
जिससे सेवा प्रदाता और उपभोक्ता दोनों
को
लाभ पहुँचेगा । ई-गर्वनेंस के साथ इस कार्यक्रम की सफलता भारतीय लोगों के सपने सच
होने जैसी होगी और उन्हें कार्य कुशलता में सुधार और समय की बचत सहित कागज़ी
कार्यवाही को घटाने में
सहजता होगी। इस योजना से वास्तव में भारत के ग्रामीण इलाकों को तेज गति की इंटरनेट
सेवा से जोडा जायेगा जिससे दूर-दराज़ के ग्रामीण लोगों को उनके पूर्ण तकनीकी विकास
में मदद मिलेगी ताकि वे आत्मनिर्भर होकर अपने कार्य आसानी से कर सकें, जिसके लिये वे कई
कारणों से कागज़ी कार्य करने में लंबी दूरी तय करते हैं और समय व पैसा बर्बाद करते है।
इंटरनेट की पहुँच में आने के बाद डिजिटल इंडिया के
नागरिक अपने कौशल स्तर और ज्ञान में भी सुधार कर सकेंगे । यह योजना नवीन नौ स्तंभों के साथ पहले
से प्रचलित राष्ट्रीय ई-गर्वनेंस योजना का एक बहुत ही प्रभावशाली
रुप है। जो इस प्रकार है:
1. मोबाइल कनेक्टिविटी
के लिए सार्वभौमिक ऐक्सेस 2. ई-क्रान्ति- सेवाओं को इलेक्ट्रॉनिक रूप से प्रदान करना 3. ई-गवर्नेन्स – तकनीक के जरिये सरकार में
सुधार 4. जनता इन्टरनेट
ऐक्सेस कार्यक्रम
5. इलेक्ट्रॉनिक
उत्पादन 6. नौकरीयों के लिए आईटी
7. जल्दी पैदावार
कार्यक्रम 8. ब्राडबेण्ड
हाई-वे 9.
सभी के लिए सूचनायें
एक अच्छे और आशाजनक प्रतिफल को प्राप्त
करने के प्रयास में यदि यह योजना कारगर साबित हुई तो भारत के लिये ये एक सुनहरे
अवसर के समान होगा । पिछले दो वर्षों में इस प्रोजेक्ट के लोकार्पण के पश्चात शुरुआत
में ही राज्य सरकारों के द्वारा योजना को अमल में लाया गया जिससे देश के लगभग 250,000 शहरों
व गाँवों
को तेज गति के इंटरनेट कनेक्शन को उपलब्ध कराने में सफलता मिली है । इस प्रोजेक्ट
में “भारत ब्रॉडबैंड
नेटवर्क लिमिटेड” द्वारा एक
महत्वपूर्णं भूमिका अदा की गयी, जो वाकई सराहनीय है ।
साथ ही सरकार विकसित देशों जैसे जर्मनी, फ्रांस आदि से भी इस प्रोजेक्ट के लिये
तकनीकि सहयोग ले रही है । फलस्वरूप इस कार्यक्रम में अभूतपूर्व तेजी के साथ अच्छे
परिणाम देखने मिल रहे है और हमारा देश पूर्ण डिजिटल होने की ओर अग्रेसर हो रहा है
।
डिजिटल इंडिया के कार्य
सम्पादन में चुनौतियां : जैसा विदित है, यह योजना भारत सरकार की टॉप प्राथमिकता
वाली एक अंतर-मंत्रालयी परियोजनाओं में से एक है जहाँ सभी मंत्रालय तथा विभाग अपनी
सेवाएं, जैसे स्वास्थ्य, शिक्षा और न्यायिक सेवा आदि जनता तक
पहुंचाएंगें । इसके लिये चयनित रूप से पब्लिक
प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल को अपनाकर एक राष्ट्रीय सूचना केंद्र का पुनर्निर्माण
होगा । यह माना जा रहा है कि इंटरनेट आनलाईन तकनीक के ज्यादा उपयोग के कारण इस
कार्य में स्पष्ट और पूर्ण पारदर्शिता के मार्ग में शुरूआती दौर पर कई कमियों का
सामना भी करना होगा जैसे लीगल फ्रेमवर्क, गोपनीयता का अभाव, डाटा सुरक्षा नियमों की कमी, नागरिक स्वायत्तता हनन, तथा भारतीय ई-सर्विलांस के लिए संसदीय
निगरानी की कमी तथा भारतीय साइबर
असुरक्षा आदि । कुछ लोगों का यह भी मानना
है कि जब तक आवश्यक ई-गवर्नेंस लागू नहीं होगा तब तक देश में डिजिटल इंडिया योजना के
कार्यांवयन में सफलता मिलने में कमी आ सकती है ।
साथ ही डिजिटल इंडिया मिशन
की राह में अभी कई
चुनौतियां कायम हैं जिसका कारण महानगरों में स्पेक्ट्रम की उपलब्धता बहुत कम है
जो तेज गति
की डेटा सेवाएं उपलब्ध कराने के रास्ते की एक प्रमुख बाधा है। जिसके असर से शहरों
सहित ज्यादा तर गांव मोबाइल कनेक्टिविटी से वंचित हैं। इसकी वजह यह है
कि इस तरह के स्थानों पर मोबाइल कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना व्यावसायिक
दृष्टि से व्यावहारिक नहीं है। वर्तमान में इस प्रोजेक्ट में उचित ई-कचरा प्रबंधन के प्रावधान की कमी, निजता सुरक्षा, डाटा सुरक्षा, साइबर
कानून, टेलीग्राफ, ई-शासन तथा ई-कॉमर्स आदि के क्षेत्र में भारत का कमजोर नियंत्रण है। इसकी वजह राष्ट्रीय
साइबर सुरक्षा योजना 2013 का अभी तक पूर्ण
क्रियांवयन ना होना है । भारत ने भी साइबर सुरक्षा चलन
में भारतीय साइबर स्पेस की कमियों को उजागर किया है। जो भारत सरकार के लिए कठिन व
चुनौती भरा कार्य होगा। सरकार ने प्रभावी कदम उठाने के लिये सूचना प्रौद्योगिकी
मंत्रियों और आईटी सचिवों का एक सम्मेलन किया जिसमें इन सभी वर्तमान परिस्थियों
में महत्वपूर्ण आधारभूत सुरक्षा का
प्रबंधन
अनिवार्य करने पर जोर देना है । अत: डिजिटल इंडिया को कार्यान्वयित करने से पहले सरकार को
उनके समक्ष आने वाली महत्वपूर्ण चुनौतीयों के निराकरण के बाद सौ प्रतिशत
पारदर्शिता के लिये बडे प्रयास करने होंगें। इस हेतु सरकार आईटी विशेषज्ञों की मदद
से सभी आवश्यक कदम उठाकर कमियों को समाप्त करने के लिये प्रतिबद्ध है ।
डिजिटल इंडिया’ से भारत का स्वरूप : ‘डिजिटल इंडिया’ की इस नई पहल से
भारत को डिजिटल लिहाज से सशक्त समाज और ज्ञान अर्थव्यवस्था
में तब्दील करना है। इसके तहत एक नवीन समीकरण बनाया गया है और लक्ष्य को पाने पर ध्यान केन्द्रित
किया जा रहा है, जो इस प्रकार है;
भारतीय प्रतिभा (आईटी) + सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) = कल का भारत ।
इस व्यापक कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों में महारत
हासिल लोग समाहित किये गये है। जहां उनके तरह-तरह के उपायों और विचारों को एकल एवं व्यापक विज़न में
समाहित किया जा रहा है, ताकि इनमें से हर विचार एक
बड़े लक्ष्य का हिस्सा नज़र आए। डिजिटल
इंडिया कार्यक्रम का समन्वय डीईआईटीवाई द्वारा किया जायेगा और इस पर अमल समूची सरकार द्वारा किया
जाना है। भारत के हर नागरिक के लिए
डिजिटल सेवाएं मुहैया कराने के लिए जैसे मोबाइल फोन व बैंक खाते की ऐसी सुविधा प्रदान हो सकेगी जिससे
डिजिटल व वित्तीय मामलों में नागरिकों की भागीदारी हो सके । सभी विभागों और न्यायालयों की
मांग पर समेकित सेवाओं समेत शासन और सेवाओं, ऑनलाइन और मोबाइल प्लेटफॉर्म पर सही समय पर सेवाओं की उपलब्धता तथा सभी नागरिकों को क्लाउड
एप पर उपलब्ध रहने का अधिकार दिया जायेगा । जिससे डिजिटल रूप से तब्दील सेवाओं के जरिये व्यवसाय
में सहजता, इलेक्ट्रॉनिक और
नकदी रहित वित्तीय लेन-देन, निर्णय सहायता सिस्टम और विकास के लिए जीआईएस का फायदा मिलेगा तथा नागरिकों को शासकीय दस्तावेजों या
प्रमाण-पत्रों आदि को उनकी मौजूदगी के बिना भी भरा जाने
का अधिकार मिल सकेगा ।
डिजिटल इंडिया के कार्य में
डेटा का डिजिटलाईजेशन आसानी से होगा जो भविष्य में चीजों को तेज और ज्यादा दक्ष बनाने में मदद
करेगा। सरकार का पूरा ध्यान राष्ट्रिय और अंतरराष्ट्रिय मुख्य कंपनियों के निवेश के साथ
कार्यक्रम को निर्धारित समय सीमा के अंदर समाप्त करने का है ।
अत: सरकार का पूरा
ध्यान डिजिटल इंडिया योजना के अंतर्गत सभी मुख्य कोर घटको पर अमल कर डिजिटल साक्षरता के साथ आधारभूत ढाँचे का निर्माण को कार्यांवित कर सेवाओं को जनता तक प्रमुखता से पहुंचाना है ताकि जनता के लिये सरकारी सेवाएं पूर्ण
पारदर्शिता से शुरू की जा सकें । इस हेतु भारत सरकार व राज्य सरकारों
के सभी विभागों व गैर सरकारी उपक्रमों और बैंकों आदि को स्पष्ट निर्देश पहले ही
दिये जा चुकें है, परिणाम स्वरूप इस पर अनुशासन के साथ काम चालू
भी हो गया है ।
डिजिटल इंडिया अभियान
से विकास : डिजिटल इंडिया अभियान के बाद ही 01
सितम्बर 2015 से सरकारी विभागों में खरीद और भुगतान आदि को PFMS और GeM जैसी आनलाईन डिजिटल सुविधा
अनिवार्य कर दी गई है जिससे सरकार को प्रत्येक लेन देन और खर्च का ब्योरा तुरंत
मिल जाता है जिससे इस कार्य में परदर्शिता आ गई है, तथा सरकार के वित्तिय बज़ट आदि की
मानीटरिंग सुगमता से करने में सफलता मिली है । इसी प्रकार लॉकर व्यवस्था लागू करने
को मुमकिन बनाया गया है जो रजिस्टर्ड संग्रह के माध्यम से ई-शेयरिंग सक्षम बनाने के साथ ही भौतिक दस्तावेज़ को कम करने के द्वारा
कागजी कार्यवाही को भी घटाएगा । इस योजना के कुछ मुख्य लाभ इस प्रकार है;
·
ये
एक प्रभावशाली ऑनलाईन मंच है जिससे कहीं से भी अपने दस्तावेज़ और प्रमाणपत्र को ई-हस्ताक्षर संरचना के द्वारा ऑनलाईन जमा
करना लोगों के लिये ये संभव बनायेगा जो शारीरिक कार्य को घटायेगा।
·
ई-अस्पताल के माध्यम से महत्वपूर्ण
स्वास्थ्य परक सेवाओं को आसान बना सकता है जैसे
ऑनलाईन रजिस्ट्रेशन, डॉक्टर से मिलने का वक्त लेना, फीस
जमा करना, ऑनलाईन लक्षणिक
जाँच करना, खून जाँच आदि।
·
अर्जियों
के जमा करने, प्रमाणीकरण प्रकिया, अनुमोदन
और संवितरण के स्वीकृति के द्वारा राष्ट्रीय
छात्रवृत्ति पोर्टल के माध्यम से लाभार्थी के लिये
ये लाभ उपलब्ध कराता है।
·
पूरे
देश में बीएसएनएल के द्वारा बड़े पैमाने का तेज गति नेट कार्यक्रम देश के ग्राम
पंचायतों को जोड़ेगा तथा एक क्लिक पर विश्व स्तरीय सेवा की उपलब्धता को मुमकिन
बनायेगा । कनेक्टिवीटी से जुड़े सभी संबंधित मुद्दों को ब्रॉडबैंड हाइवे संभालेगा ।
उपर्युक्त सभी लाभों के अतिरिक्त, सरकार समयबद्ध कार्यान्वयन के लिए
मीडिया और मनोरंजन क्षेत्र के अधिक विकास के लिए
उपयुक्त वातावरण उपलब्ध करने के लिए
वचनबद्ध है और डिजिटल प्रसारण के नये
युग में प्रवेश करने की दहलीज पर है । डिजिटल इंडिया कार्यक्रम को हाईटेक
बना कर मेक इन इंडिया के तहत विभिन्न डिजिटल उपकरणों का निर्माण देश में ही होगा जिससे देश में रोजगार सहित विकास को बढ़ावा मिलेगा । सोशल मीडिया, फेसबुक के जरिए लोग अपनी समस्याएं और उसका
निस्तारण लाइव कर सकेंगे । डिजिटल बैंकिंग में आ रही दिक्कतों के लिये जागरूकता एवं साक्षरता
कार्यक्रम के तहत लेने-देने में सुरक्षित व्यवस्था के साथ भ्रष्टाचार से भी मुक्ति के प्रयास में सफलता मिल रही है । डाक विभाग ने अपना
'पोस्ट मैन मोबाइल
ऐप्लीकेशन' लांच कर डाकियों के
कामकाज की गति को बढ़ाने के उद्देश्य से
उन्हें स्मार्ट फोन से लैस किया जिससे कागजों पर पावती का हस्ताक्षर, डाक संबंधी शिकायतों व सुझावों को दर्ज करना जैसे काम
बहुत आसान व तेज हो जाएगें ।
साथ ही डिजिटल व्यवस्था से
कई बाज़ार और महत्वपूर्ण हिस्से वाई फाई से
कवर किये जाने के बाद देश की ट्रांसपोर्ट, महिला
सुरक्षा,
वॉटर मैनेजमेंट, इलेक्ट्रिक्सिटी,
पार्किंग जैसी समस्याओं का समाधान हुआ है । टोल टैक्स पर RFID
कार्ड/टैग के जरिये 10% का डिस्काउंट,
रेलवे द्वारा 10
लाख का फ्री बीमा ऑनलाइन रेलवे टिकट खरीदने पर, कृषि से जुड़े ग्रामीण इलाकों में रहने
वाले किसानों को फर्टिलाईज़र प्राप्त करने में फायदा,
तथा तेजी से बदलते भारत से युवाओं में कुछ कर दिखाने
की क्षमता बढी है, ये सब कुछ सरकार के डिजिटल इंडिया कार्यक्रम की वजह से हुआ है । शिक्षा के क्षेत्र
में डिजिटल इंडिया के जरिये आनलाईन पढाई के साथ पारदर्शिता लाई जा रही है, जिससे बच्चों के
भविष्य के साथ बुरा बरताव ना हो और उनका भविष्य उज्जवल बनाने के मार्ग में कोई
बाधा ना सके । इस हेतु भी कई सम्मेलन
आयोजित कर विभिन्न तकनीकी सत्रों में आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, वेब आधारित कम्प्यूटिंग,
मशीन लर्निंग, एप्लाइड मैथमेटिक्स
कम्प्यूटिंग, मैथमेटिक्स इंजीनियरिंग एप्लीकेशंस, क्लाउड कम्प्यूटिंग,
वायरलेस नेटवर्क सिक्योरिटी इंजीनियरिंग
जैसे विषयों पर शोधपत्र प्रस्तुत
कर शिक्षार्थियों को हर विषय की
ट्रेनिंग दी जा रही है ।
वर्तमान में सुगम न्यायिक व्यवस्था के लिये सर्वोच्च न्यायालय को डिजिटल ऑन
लाइन किया गया जिससे मुकदमों की डिजिटल फाइलिंग से न्यायिक तंत्र बेहद
पारदर्शी होगा और रिकार्डों की हेराफेरी नहीं हो पाएगी। अब सुप्रीम कोर्ट में मुकदमा दायर करने के लिए हाई कोर्ट के मुकदमे की मोटी-मोटी फाइलें और कागज के पुलिंदों की जरूरत नहीं होगी, न ही मुकदमे के
लिए घंटों फाइलिंग काउंटर पर लाइन में लगना होगा। इससे सुप्रीम कोर्ट के कार्य पेपरलेस होने तथा
फैसले आदि में समय की बचत की दिशा में एक कदम और आगे बढ़ गया है। डिजिटल इंडिया का लक्ष्य हासिल करने के लिए तैयार हो रहे सरकारी सेवाओं के मोबाइल एप जैसे यूपीआई और भीम विकसित किए गए हैं जिसका उपयोग कर लोग आसानी से क्रय
विक्रय कर पा रहे है । इन एप्लिकेशन्स/सॉफ्टवेयर उत्पादों की अफ्रीकी, आसियान और अन्य
विकासशील देशों के बाजारों में मांग की संभावनाएं
तलाशी जा रही है । इससे भरोसा जगा है कि भारत डिजिटल अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण
ताकत बन सकता है ।
हम
होंगे कामयाब -
सरकार की डिजिटल इंडिया योजना के भविष्य की सम्भावनाओं, उसके स्वरूप, विकास तथा उससे होने वाले लाभ आदि पर
उपर्युक्त बताये गये सभी बिंदुओं के अनुसार यह कहा जा सकता है कि सरकार ने डिजिटल
इंडिया योजना के शुभारंभ के पश्चात अपने सभी प्रयासों से भारत में इंटरनेट का
प्रयोग करने वालों की संख्या
60 करोड़ से अधिक करके भारत को पूर्ण डिजिटल
बनाने और लोगों द्वारा इसको अपनाने के कार्य में तेजी से कदम बढ़ा दिए हैं जिसमें आशातित
अभूतपूर्व सफलता भी मिली है । माना जा रहा है कि वर्ष 2020 तक डिजिटल इंडिया मिशन को पूर्ण सफलता हासिल हो जायेगी और
हमारे देश के ज्यादातर लोग इलेक्ट्रानिक रूप से कागज रहित तथा पूरे पार्दर्शिता के
साथ सभी सरकारी सेवाओं (ई-गर्वनेंस) का लाभ लेकर देश के इस बडे कार्य में अपना सहयोग
कर देश के पर्यावरण सहित मूल्यवान समय और मानव श्रम को बचाने में अपना महत्वपूर्ण
योगदान देंगे । सरकार की इस योजना से हमारे देश का चहुंओर सर्वांगीण विकास होगा, नये रोजगार के मौके मिलेंगे, शिक्षा का स्तर बढेगा, न्यायपालिका में आवश्यक सुधार होगा तथा
सरकार और समाज के प्रत्येक आर्थिक कार्य बिना नगदी (कैश लेस) और खरीद और पैसे के
लेनदेन में बिना किसी अवरोध या घपले आदि से आसानी से हो सकेंगे । जिससे गरीबी, साक्षरता, स्वास्थ,
शिक्षा आदि को दूर कर लोगों के रहन सहन में सुधार होगा जो हम सब के लिये आज की दशा
में सबसे बडी और जरूरी कामयाबी होगी ।
आज हम सब का कर्तव्य है, कि हम अपने देश के सर्वांगीण विकास के
लिये सरकार की डिजिटल इंडिया योजना के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आवश्यक सहयोग
प्रदान करें जिससे हमारा देश भी पूर्ण डिजिटल होकर विश्व के विकासशील देशों की तरह
विकास की ऊंचाईयों पर अपने कदम बढाये,
तब हम सभी गर्व से और अधिक कह सकेंगे कि “सारे जहां से अच्छा हिंदुस्तां हमारा”
...।
Sunday, January 18, 2015
“ॐ” शब्द के उच्चारण से पायें शारीरिक रोगों पर विजय
भारतीय योग को विश्व के 177 देशों के द्वारा स्वीकारनें
के बाद संयुक्त राष्ट संघ से मान्यता मिल गई है।
वैज्ञानिक रूप से आधारित भारतीय योग की विश्वव्यापी
ख्याती हमारे देश के लिये एक महान उपलब्द्धि है। जो आज के युग में भी हमारी भारतीय संस्कृति के योग और परम्परायें, कलायें और चिकित्सा आदि में प्रत्येक काल की तरह बहुत ही वैज्ञानिक और प्रासंगिक है। क्या आप जानते है कि योग क्रिया के अंतर्गत ही ॐ के उच्चारण की क्रिया को, जो प्राणायाम, अनुलोम और विलोम जैसे योग या शारीरिक व्यायाम की तरह ही है, को प्रतिदिन 108 बार ॐ का उच्चारण करने से हमें अनेक शारीरिक लाभ होते है।
पुरातन काल और पौराणिक इतिहास के ग्रंथो से ऐसा माना जाता
है, कि सम्पूर्ण सृष्टि की उत्पत्ति “ॐ” शब्द के नाद से ही प्रारम्भ हुई
है। ॐ शब्द तीन अक्षरों अ, उ और म से बना है। जिसमें “अ” का अर्थ है, उत्पन्न होना या प्रारम्भ होना। “उ” का अर्थ उठना अर्थात विकास से होता है। तथा “म” का तात्पर्य
है, मौन/शांत हो
जाना अर्थात ब्रम्हलीन हो जाना। अत: ॐ शब्द में
जीवन का पूर्ण सार छुपा हुआ है, जिसमें जीवन की उत्पत्ति (जन्म/बचपन) के बाद जवानी
(उठना/विकास) और अंत में बुढापा (मरण/मौन/शांती)।
प्रतिदिन ॐ के उच्चारण से उत्पन्न नाद और कम्पन हमारे शरीर
की सभी इंद्रियों में उर्जा का संचार करता है, जिससे हमारे शरीर की आत्मा शुद्ध
होती है, साथ ही हमारे आसपास का वातावरण भी
शुद्ध होकर ओंकारमय हो जाता है। इसलिए हमारे हिंदु
समाज में देवी देवताओं की पूजा अर्चना में उपयोग किये गये मंत्रो से पहले ॐ शब्द
का उच्चारण सर्वथा अनिवार्य रूप से किया जाता है। अत: आज के युग में भी ॐ का उच्चारण करना हमारी
भारतीय संस्कृति की परम्परायें, कलायें, चिकित्सा और योग आदि प्रत्येक काल की तरह बहुत ही
वैज्ञानिक और प्रासंगिक है, जो हमारे मन, मस्तिष्क को शुद्ध कर शारीरिक लाभ प्रदान करता है।
आईये ॐ के उच्चारण या जाप से हमारे शरीर के अनेक रोगों पर
होने वाले स्वास्थ्यवर्धक और आरोग्यमय प्रभाव को जानते है;
1. थायरायड = ॐ का उच्चारण प्रतिदिन करने से उत्पन्न
होने वाले गले में कम्पन से थायरायड ग्रंथि पर सकारात्मक प्रभाव पडता है जिससे हमें
इस बीमारी से निजात मिलती है।
2. तनाव और घबराहट = प्रतिदिन ॐ का उच्चारण, शरीर में विकसित विषैले तत्वों और द्रव्यों को नियंत्रित
करने का उत्तम साधन है जो हमें तनाव रहित कर घबराहट जैसे रोगों को नियंत्रित करके
हमारे लिये लाभकारी होता है।
3. पाचन और खून का प्रवाह = इन बीमारीयों में ॐ का
प्रतिदिन उच्चारण करने से पाचन शक्ति बढती है और खून के प्रवाह के साथ ह्रदय की
धड्कनों को संतुलित करता है।
4. थकान और कमजोरी = प्रतिदिन ॐ का उच्चारण से शरीर की नसों में खून
का संचार बढता है जिससे थकान दूर होती है एकाग्रता बढती है और शरीर में युवा
अवस्था वाली स्फूर्ति का संचार होता है ।
5. रीड की हड्डी और फेफडें = हमारे शरीर के इन
प्रमुख अंगों का सबसे ज्यादा महत्व है और यदि इन अंगों में तकलीफ हो तो प्रतिदिन ॐ
का उच्चारण करने से शारीरिक क्षमता बढने के साथ फेफडों को आवश्यक फायदा होता है।
अतः उपरोक्त बताये गये रोगों तथा अन्य रोगों पर ॐ का उच्चारण
योग के साथ करने से अवश्य ही लाभ मिलेगा । जैसा हम सभी जानते है, यदि हमारा शरीर स्वस्थ्य और निरोगी काया का होगा तब हम
सबसे सुखी और सबसे धनी इंसान होंगे, इसलिए हमें अपने शरीर को निरोगी बनाने के लिये समय समय
पर कुछ चिंता अवश्य करनी चाहिये। हमने देखा है जो लोग प्रतिदिन
व्यायाम/वर्जिश करते है वे शारीरिक रूप से ताकतवर और स्वस्थ्य रहकर सदैव क्रियाशील
रहते है। अत: आप सभी से आशा है कि आप अपने व्यस्त कार्यक्रम में से कुछ समय
निकालकर वर्जिश के रूप में प्रतिदिन ॐ का उच्चारण करेंगे और जीवन में सदा सुखी और स्वस्थ्य रहे।
Friday, January 2, 2015
जीवन में सदा मुस्कुराते रहें
नव वर्ष 2015 का शुभारंभ हो गया है, आप सभी को नव वर्ष की अनेक हार्दिक शुभकामनायें देता हूं
और ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि यह वर्ष आप सभी के लिये मंगलमय हो, आपका स्वास्थ्य उत्तम हो, आपके घर पर लक्ष्मी सदा विराजमान रहे, आपकी सारी भावी इच्छाओं को पूर्ति हो और आप जीवन के हर
पहलू में सदा मुस्कुराते रहें।
जीवनचक्र के दो मुख्य पहलू सुख और दुख होते है, इन दोनों पहलूओं के मध्य सामंजस्य बनाते हुये हमें जीवन
पर्यंत सामना करते हुये चलना होता है। प्रथम पहलू सुख का अर्थ है, आपका जीवन निरोगी काया के साथ कुशलपूर्वक होना और जीवन में
किसी बात की परेशानी बिना चहूंओर मंगल ही मंगल होना । आवश्यक अच्छा धन व ऐश्वर्यता, अच्छा स्वास्थ्य, अच्छा परिवार, अच्छी शिक्षा, अच्छा खानपान-रहनसहन, कार्य में
अच्छी सफलता और सामाजिक आदर आदि जिसके साथ हम बिना किसी बात की चिंता किये अपने जीवन
का कुछ समय आनंद और खुशहाली के वातावरण में व्यतीत कर लेते है, यही जीवन का सुख है।
वहीं मुझे लगता है, जीवन के दूसरे पहलू दुख का अर्थ है, हमारे जीवन के उपरोक्त बताये सुख के प्रकारों में कहीं ना कहीं
कमी या व्यवधान आना जो हमारे अंदर अमंगलता का डर पैदा कर देता है और हमारी मानसिकता
को थोडे समय के लिये निराशा का भाव उत्पन्न कर पूरी तरह से भ्रमित करके हमें विचलित
कर देता है । किसी ने सही कहा है आगे सुख है तो पीछे दुख है हर दुख में एक सुख है
। धन की कमी, शारिरिक रूप से स्वास्थ्य में खराबी
या बीमारी, परिवार में एकजुटता में कमी, शिक्षा में कमी, कार्य में असफलता और सम्मान में कमी, पर्याप्त खानपान और रहनसहन में कमी आदि आदि परिस्थितियां हमें
जीवन में कभी ना कभी झेलने पर मजबूर होना पडता है जिसे हम जीवन का दुख मान लेते है
। किंतु यह जीवनचक्र की सच्चाई है इसे हमें सहज लेकर मात्र जीवन का छोटा सा कष्ट समझ
कर मुस्कुराते हुये स्वीकार करना चाहिये उसी में जीवन का मजा है और यही जीवन जिने की
कला है ।
अत: यह सिद्ध होता है कि जीवन के दोनों ही पहलू सुख और दुख एक
दूसरे के पूरक है। हम सभी सौभग्यशाली है कि भगवान ने हमें जो बहुमूल्य जिंदगी या जीवन
दिया है उसे हम अपने अच्छे और भले कर्मों के द्वारा कर्तव्यों का पालन करते हुये परिपूर्ण
करें और जीवन को आनंद के साथ मुस्कुराते हुये गुजारें । बुरे कर्मों या कार्यो को नकारे
और उनसे सबक लेकर अच्छे कार्य करें क्योकिं हम जानते है कि बुरे काम का बुरा नतीजा
ही होता है जो आपके जीवन को दुखी कर देता है।
मुझे लगता है कि वर्ष 2015 में हम यह संकल्प और प्रण करें कि
हम हमारे जीवन के हर मोड और पहलू पर आने वाले सुखों और कष्टों के पलों को वास्तविकता
से हंसते मुस्कुराते हुये व्यतीत करें जिससे हमें अपने भावी जीवन को सुधारने, सवांरने और समझने में मदद मिले और जिससे हमें जीवन की सम्पूर्णता
के छुपे रहस्य की अनुभूती हो सके । अत: मुस्कुराते हुए रहने से हम हमारे बहुत से कष्टों
पर विजय पा सकते है।
अत: आज ही से हम अपने घर परिवार, आसपास, समाज और सरकारी
कार्यो में मिलने वाले लोगों के साथ मिलजुल कर उनके हर सुख दुख में हंसते मुस्कुराते
हुए सहयोग करें तो आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि हम हर जगह सफल होंगे जिससे हमारे
जीवन का समय आनन्दपूर्वक कट जायेगा ।
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